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तस्वीर

एक तस्वीर ओझल सी होती है आज आँखों से,  एक बरस एक जुनून की तरह थी वो झूमती, हाथों में ले रंग घूमते थे हम मुसल्सल,  और वो हमारी नादानी देख दूर से ही मुस्कुराती ।
हसरत यह थी कि एक रोज़ बेपनाह रंग भरेंगे,  बड़ी  शिद्दत से उसे अपना कर लेंगे , पर इस  रोज़ ,जब मौका भी है और दस्तूर भी, फिर क्यों , ऐ दिल  तू आज  इतना तंग है?   फिर क्यों आज ,वो तस्वीर यूँ बेरंग है?
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